Rashtriya Chetna Ke Swar - राष्ट्रीय चेतना के स्वर

जय भारत जननी


भारतमाता बुधजनगीता

निर्मलगंगा-जलपूता॥
शिरसि विराजित-हिमगिरिमुकुटम्
चरणे हिन्दु-महोदधि-सलिलम्
जघने शस्य-लता तरु-वसनम्
जय भारतजननी॥ १॥

ऋषिवर-घोषित-मन्त्र-पुलकिता
कविवर-गुम्फित-पावन-चरिता
धीर-वीर-नृप-शौर्य-पालिता
जय भारतजननी ॥ २॥

मनसि मे सदा तव पदयुगलम्
संस्कृत-संस्कृति-सतत-चिन्तनम्
भाव-राग-लय-ताल-मेलनम्
जय भारतजननी ॥ ३॥