Rashtriya Chetna Ke Swar - राष्ट्रीय चेतना के स्वर

जय जय हे भगवति


य जय हे भगवति सुरभारति तव चरणौ प्रणमाम:।
नादब्रह्मïमयि जय वागीश्वरि शरणं ते गच्छाम:
त्वमसि शरण्या त्रिभुवनधन्या वन्दित-सुर-मुनि-चरणा
नवरसमधुरा कवितामुखरा स्मित-रुचि-रुचिराभरणा॥
जय जय हे……………………(१)

आसीना भव मानसहंसे कुंद-तुहिन-शशि धवले
हर जडतां कुरु बुद्धिविकासं सित पंकज तनु विमले॥
जय जय……………………….(२)

ललितकलामयि ज्ञानविभामयि वीणा-पुस्तक-धारिणि
मतिरास्तां न:तव पदकमले अयि कुण्ठाविषहारिणि
जय जय हे……………………(३)

-डॉ नारायणभट्ट

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