परिषद चिकित्सालय के डॉक्टरों ने दिल के मरीज  का कठिनऑपरेशन कर एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की

परिषद चिकित्सालय के डॉक्टरों ने दिल के मरीज का कठिनऑपरेशन कर एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की

कोटा. शहर के भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र में (कार्डियक सर्जरी विभाग) डॉक्टरों ने मरीज के दिल के एकसाथ चार तरह के ऑपरेशन कर एक बड़ी और हैरान कर देने वाली उपलब्धि हासिल की है। कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि बूंदी निवासी तेईस वर्षीय युवक शिवराज बचपन से ही ह्रदय की जन्मजात बीमारी ट्रेट्रोलॉजी ऑफ फैलॉट बीमारी से ग्रसित था, जिसकी वजह से उसका पूरा शरीर नीला पड़ा हुआ था और उसे सांस लेने में भी तकलीफ थी। परिजनों द्वारा इस बीमारी का इलाज बचपन में नहीं कराने से शरीर की एक महाधमनी सिकुड़ गई थी और दूसरी महाधमनी फूलकर काफी बड़ी हो गई थी, जिसके कारण वॉल भी लीकेज हो चुका था। इससे मरीज की जान को खतरा पैदा हो गया था। परिजनों की काउंसलिंग और सहमति के बाद 3 फरवरी को टॉफ और बेनटाल सर्जरी की गई। जिसमें मरीज के दिल के 3 सेमी के छेद को बंद किया, सिकुड़ी हुई महाधमनी को चौड़ा किया, वॉल को बदला और फूली हुई महाधमनी को हटाकर नई महाधमनी लगाई। घंटों तक चले ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है।

बचपन में ही जरूरी था इलाज
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को यह जन्मजात बीमारी थी, शरीर में दो महाधमनियां होती है, एक पूरे शरीर को और दूसरी दोनों फेफड़ों को ब्लड सप्लाई करती है। इस केस में एक महाधमनी सिकुड़ी हुई थी, जिससे शरीर और हार्ट में ब्लड सप्लाई का फ्लो एक ही महाधमनी पर पड़ रहा था, जिससे शरीर बढऩे के साथ ही सूजन बढती जा रही थी। जिससे उसके फटने का भी खतरा पैदा हो रहा था। उन्होंने बताया कि ऐसे केस में बपचन में ही ऑपरेशन होना जरूरी है, वरना महाधमनी फटने से जान पर बन सकती है।

भाविप की उपलब्धि प्रदेश के लिए गौरव की बात
भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के संरक्षक श्याम शर्मा, अध्यक्ष अरविन्द गोयल, सचिव ओमप्रकाश विजय, कोषाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा एवं उनकी पूरी टीम को इस जटिल ऑपरेशन के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत विकास परिषद चिकित्सालय में हुए इस अतिदुर्लभ ऑपरेशन ने कोटा ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि तमाम जानकारी करने के बाद भी इस तरह की सर्जरी का देशभर में कहीं भी होना नहीं पाया गया। जो कि इस संस्थान के डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि है। यह ऑपरेशन भामाशाह के तहत निशुल्क किया गया है। उन्होंने कहा कि अनुभवी चिकित्सकों द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित किये जा रहे हैं, उससे पूरे हाड़ौती संभाग व अन्य जिलों के मरीजों को मैट्रो सिटी जैसा इलाज कोटा में ही उचित दर पर मुहैया हो रहा है। यह भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के लिए भी गौरव की बात है।

Patrika News 7 February, 2020

भारत विकास परिषद हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी विभाग ने हार्ट का जटिल ऑपरेशन किया

कोटा. भारत विकास परिषद हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी विभाग में एक मरीज के हार्ट का ऐसा ऑपरेशन किया गया है, जिसे विशेषज्ञ डॉक्टर भी चमत्कार बता रहे हैं। डाॅक्टराें के अनुसार एक ही सीटिंग में मरीज के 4 तरह के प्रोसीजर किए गए। चारों इतने जटिल थे कि रत्तीभर की गड़बड़ी मरीज की जान ले सकती थी। मरीज के दिल के 3 सेमी छेद को बंद किया। फेफड़ों को ब्लड सप्लाई करने वाली महाधमनी (पल्मोनरी आर्टरी) सिकुड़ी हुई थी, उसे खोला गया। पूरे शरीर को ब्लड सप्लाई करने वाली दूसरी महाधमनी (एओर्टा) इतनी फूल चुकी थी कि उसके फटने का खतरा था, ऐसे में उसे बदला गया और मुख्य वॉल्व को भी बदला गया।

यह सब सुनने में भले ही अासान लगता है, लेकिन जब ऑपरेशन थिएटर में ये प्रोसीजर किए जा रहे हाेते हैं तो बड़े से बड़े डॉक्टरों के भी हाथ कांपने लगते हैं। अस्पताल के चीफ कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि ऐसी सर्जरी के बारे में हमने न कभी सुना, न ही किसी लिटरेचर में पढ़ा। बूंदी निवासी शिवराज (23) जन्मजात हार्ट डिजीज का शिकार था। उसे गत दिनों हमारे पास लाया गया, उसका पूरा शरीर नीला पड़ा था और सांस में तकलीफ थी। सर्जरी करने वाली टीम में कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा के अलावा कार्डियक एनेस्थेटिक डॉ. सनी केसवानी, डॉ. प्रभा खत्री, डॉ. महेश, डॉ. सरिता, सीनियर परफ्यूजनिस्ट प्रमोद कुमार, फिजिकल असिस्टेंट ललित कुमार, स्क्रब नर्स अर्पित जैन, विजय शर्मा, एनेस्थिसिया टेक्निशियन सागर पंवार, परफ्यूसनिस्ट सुनील पूरबिया, नाजिर मिर्जा आदि शामिल थे।

सरकारी याेजना में फ्री हुआ ऑपरेशन
जांचों से पता चला कि रोगी को चारों तरह के कॉम्पलिकेशन हैं और इन सभी को एक साथ ऑपरेट करना होगा। सबसे अहम बात यह थी कि मरीज सरकारी योजना का लाभार्थी था, ऐसे में उसे कोई पैसा नहीं देना था, जबकि इन ऑपरेशन के लिए उसे करीब 5 लाख रुपए खर्च करने पड़ते। परिजनों की सहमति के बाद 3 फरवरी को ऑपरेशन किया। जिसमें करीब 6 घंटे तक डॉक्टरों की टीम ने पूरी मेहनत की और चारों प्रोसीजर सफल कर दिए। अभी मरीज पूरी तरह सामान्य है। डॉ. सौरभ ने बताया कि मरीज को यह जन्मजात बीमारी थी, ऐसे केस में बपचन में ही ऑपरेशन होना जरूरी है।

थिएटर में ये प्रोसीजर किए जा रहे हाेते हैं तो बड़े से बड़े डॉक्टरों के भी हाथ कांपने लगते हैं। अस्पताल के चीफ कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि ऐसी सर्जरी के बारे में हमने न कभी सुना, न ही किसी लिटरेचर में पढ़ा। बूंदी निवासी शिवराज (23) जन्मजात हार्ट डिजीज का शिकार था। उसे गत दिनों हमारे पास लाया गया, उसका पूरा शरीर नीला पड़ा था और सांस में तकलीफ थी। सर्जरी करने वाली टीम में कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा के अलावा कार्डियक एनेस्थेटिक डॉ. सनी केसवानी, डॉ. प्रभा खत्री, डॉ. महेश, डॉ. सरिता, सीनियर परफ्यूजनिस्ट प्रमोद कुमार, फिजिकल असिस्टेंट ललित कुमार, स्क्रब नर्स अर्पित जैन, विजय शर्मा, एनेस्थिसिया टेक्निशियन सागर पंवार, परफ्यूसनिस्ट सुनील पूरबिया, नाजिर मिर्जा आदि शामिल थे।

दैनिक भास्कर : 07 February, 2020

Leave a Reply

Close Menu