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VIP Sampark / विशिष्ट व्यक्ति सम्पर्क


विशिष्ट व्यक्ति सम्पर्क योजना - परिषद् का प्रथम सूत्र
आधुनिक युग में दूरभाष, मोबाईल फोन, ई-मेल इत्यादि यांत्रिकी सुविधाजनक संम्पर्क माध्यमों का भरपूर उपयोग हो रहा है। पर यह भी सच है कि व्यक्तिगत सम्पर्क का स्थान यह यांत्रिकी साधन कभी नहीं ले सकते। व्यक्तिगत सम्पर्क ही आत्मीय, स्थायी, और प्रभावी सम्पर्क हैं, इसमें समय और ऊर्जा की आवश्यकता है। पर व्यक्तिगत सम्पर्क के अभाव में निर्धारित लक्ष्य पाना कठिन प्रतीत होता है।

विशिष्ट व्यक्तियों की व्यस्तता, उनकी गुणवत्ता और उनके स्वभाव को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत सम्पर्क की निम्न योजना प्रभावी हो सकती है।

1. सम्पूर्ण कार्य क्षेत्र को भौगोलिक दृष्टि से सुविधाजनक इकाईयों में विभाजित करना।

2. प्रत्येक इकाई में 3 सदस्यों की टोली का गठन करना।

3 यह तीनों सदस्य मृदुभाषी, सहनशील, वाक्पटु एवं भारत विकास परिषद् की विचार धारा से पूर्ण परिचित हों और उसे सरल शब्दों में व्यक्त करने की क्षमता रखते हों।

4. भारत विकास परिषद् की विचारधारा एवं सम्पर्क के उद्देश्य की स्पष्टता के लिए टोली के सदस्यों को उच्चपदाधिकारियों से विशेष चर्चा करना अति आवश्यक है।

5. यह टोली स्वयं ही अपने क्षेत्र के सम्पर्क योग्य व्यक्तियों की सूची तैयार करेगी।

6. व्यक्तिगत सम्पर्क के लिए उपरोक्त टोली छुट्टी के दिन सुबह या शाम का समय, जिस व्यक्ति से मिलने जाना है, उसकी एवं स्वयं की सुविधा अनुसार चुन सकते हैं।

7. टोली अपनी सुविधानुसार सप्ताह में एक प्रातः अथवा एक शाम ही मिलने के लिए निश्चित् करे। इससे अधिक समय देना टोली के सदस्यों के लिए भी कठिन हो सकता है।

8. टोली का कौन सा व्यक्ति दूरभाष से मिलने वाले से समय लेगा और कौन-कौन मिलने जायेंगे, यह टोली के सदस्य मिलने वाले व्यक्ति के स्वभाव को ध्यान में रख कर स्वयं निश्चित् करें।

9. जिन व्यक्तियों से मिलना है उनसे दूरभाष पर जो समय लिया है ठीक उसी समय पहुँचे।

10. मिलने वाले व्यक्ति के संदर्भ में उससे क्या बात करनी है और कितनी बात करनी है, यह पहले से निश्चित् कर लें।

11. कम से कम दो और अधिक से अधिक तीन व्यक्ति ही मिलने जायें, एक व्यक्ति का मिलना संस्थागत प्रभावी नहीं होता है और तीन से अधिक व्यक्ति मिलने वाले व्यक्ति के लिए असुविधाजनक हो सकते हैं।

12. मिलने वाले व्यक्ति से अपनी बात सूक्ष्म में कहें और उसकी बात को ध्यान से सुनें, सराहें, कुछ अच्छा हो उसे लिख लें। विवाद अथवा तर्क न करें। कम बोले, सुनें ज्यादा।

13. मिलने वाले व्यक्ति के परिवार में और भी सदस्य होंगे, उनकी मान मर्यादा का ध्यान रखें और उनके प्रति भी आदर व्यक्त करें।

14. मात्र एक गिलास पानी अथवा एक कप चाय तक ही उनका आग्रह स्वीकार करें। और यदि जलपान रख ही दिया गया है तो उसका न्यूनतम उपयोग करें।

15. मिलने का समय मिलने वाले की सुविधानुसार कम से कम रखें। आज के समय में 30 मिनट किसके पास हैं?

16. वार्तालाप की मुख्य बातें लिख लें और अगली बार जब जायें तो उनका उपयोग करें जिससे निरंतरता बनी रहे।

17. मिलकर लौटते वक्त प्रसन्नचित्त और पुनः मिलने के आग्रह से ही वापस आयें।

18. एक माह में मात्र 10 व्यक्तियों से ही सम्पर्क करने का लक्ष्य रखें।

19. यह प्रक्रिया 6 महीने बाद पुनः दोहरायी जाए और इस बीच एक सेमीनार/सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करें। उसमें सभी नवपरिचितों को आमन्त्रित कर किसी विशेष विषय पर प्रभावी चर्चा करें।
 
20. इस तरह एक वर्ष में उस क्षेत्र के लगभग 50-60 व्यक्तियों से तीन व्यक्तियों की एक टोली का अच्छा सम्पर्क स्थापित हो जाएगा। इससे अधिक लक्ष्य पाना कठिन हो सकता है।

21. उपरोक्त सभी सम्पर्क व्यक्तियों को भारत विकास परिषद् के कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से आमन्त्रित करते रहें एवं फोन द्वारा समय-समय पर संबंध भी कायम रखें, लिखित सामग्री भी भेजते रहें।

22. यदि यह व्यक्ति किसी अन्य स्थान पर भी मिल जायें तो अभिवादन करना न भूलें।

विशिष्ट व्यक्तियों से सघन व्यक्तिगत सम्पर्क किस तरह से और कैसे स्थापित होगा, मूलतः यह टोली के सदस्यों के विवेक और परिश्रम पर ही निर्भर करेगा। सुविधा अनुसार उपरोक्त योजना आंशिक अथवा पूर्णरूप में अपनाई जा सकती है।

मुझे विश्वास है कि समर्पित सदस्य इस व्यवस्था को क्रियान्वित करने में सफल होंगे। अनुभव के आधार पर इस व्यवस्था पर पुनर्विचार होता रहना वांछनीय है।
 - प्रो॰ सत्यप्रकाश तिवारी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

 

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