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समाचारों में भारत विकास परिषद् >>

राष्ट्रीय परिषद अधिवेशन ‘‘उद्घोष-2010’’ आगरा (ब्रज प्रदेश) 25-26 दिसम्बर 2010

भारत विकास परिषद का राष्ट्रीय परिषद अधिवेशन ‘‘उद्घोष-2010’’ दिनांक 25-26 दिसम्बर 2010 को ब्रज प्रान्त के आतिथ्य में ऐतिहासिक आगरा नगर में पूर्ण गरिमा व भव्यता के साथ सूरसदन प्रेक्षागृह में सम्पन्न हुआ। शनिवार 25 दिसम्बर 2010 को मुख्य अतिथि प.पू. स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज द्वारा ध्वजारोहण तथा भारतमाता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ अधिवेशन का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर स्वामीजी ने परिषद के पांच सूत्रों सम्पर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा एवं समर्पण की व्याख्या करते हुए कहा कि यह सच्ची मानवता के पर्याय हैं। उन्होंने मनुष्य के जीवन में श्रम की महत्ता समझाते हुए, श्रम को ईश्वर की उपासना के समान बताया, साथ ही अंहकार से दूर रहने का सन्देश दिया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रवीन्द्रपाल शर्मा ने अधिवेशन के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। प्रारम्भ में अधिवेशन चेयरमैन एवं प्रान्तीय अध्यक्ष डा. तरूण शर्मा ने अतिथियों का स्वागत एवं मंच का परिचय प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र में परिषद की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री श्री सुरेन्द्र कुमार वधवा ने सत्र 2009-10 की उपलब्धियों, कार्यक्रमों व सांगठनिक अभिवृद्धि की जानकारी प्रदान की। इसी सत्र में नवीन विकास-रत्नों का सम्मान भी किया गया। स्वागताध्यक्ष डा. राम अवतार शर्मा ने आगरा नगर के गौरवपूर्ण इतिहास की जानकारी देते हुए नगर की ओर से समस्त प्रतिनिधियों का स्वागत किया और श्री जगन प्रसाद गर्ग, विधायक एवं श्री विक्रम उपाध्याय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। अधिवेशन समारिका ‘‘उद्घोष-2010’’ का विमोचन भी किया गया। उद्घाटन सत्र का संचालन अधिवेशन सचिव श्री राजीव अग्रवाल ने किया।

दोपहर भोज के पश्चात् प्रथम तकनीकी सत्र राष्ट्रीय महामंत्री श्री सुरेन्द्र कुमार वधवा के संचालन में प्रारम्भ हुआ। इस सत्र में सभी 17 जोन के अध्यक्ष/महामंत्रियों ने अपना-अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस सत्र में अधिकतम विकास-रत्न एवं विकास-मित्र बनाने वाले प्रान्तों को सम्मानित किया गया। द्वितीय तकनीकी सत्र का संचालन राष्ट्रीय संयुक्त संगठन मंत्री एवं अधिवेशन समन्वयक श्री केशवदत्त गुप्ता ने किया। इस सत्र ने उन प्रान्तों के प्रतिवेदन प्रस्तुत किये गये, जिन्होनें गत सत्र में राष्ट्रीय प्रकल्पों/कार्यक्रमों का आतिथ्य किया था। इसी सत्र में ‘मुक्त चिन्तन’ के अन्तर्गत प्रतिनिधियों के सुझाव तथा प्रश्नों का समाधान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रवीन्द्रपाल शर्मा, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री ईश्वर दत्त ओझा व राष्ट्रीय महामंत्री श्री सुरेन्द्र कुमार वधवा ने किया।

सांयकाल में प्रेक्षागृह के भव्य मंच पर आयोजित मनोहारी सांस्कृतिक-संध्या में कलाकरों ने आकर्षक व नयनाभिराम ब्रज संस्कृति की प्रस्तुति से उपस्थित जन समुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। अधिवेशन चेयरमैन डा. तरूण शर्मा के सरस व कुशल संचालन में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में ब्रज के लोक संगीत व होली गीतों पर कोई भी व्यक्ति स्वयं को थिरकने से रोक न सका। इससे पूर्व सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ करते हुए गीता मनीषी महामण्डलेश्वर स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने ईश्वर के प्रति समर्पण भाव से सेवा करने का सन्देश दिया। उन्होंने ब्रज प्रान्त की पत्रिका ‘‘ब्रज-नीति’’ के द्वितीय अंक का विमोचन भी किया।

द्वितीय दिवस 26 दिसम्बर 2010 को प्रातः 10 बजे से वैचारिक सत्र में मुख्य अतिथि डा. लक्ष्मी कांता चावला (कैबिनेट मंत्री, पंजाब सरकार) ने महिलाओं से कन्या भ्रूण हत्या के विरूद्ध खड़े होने का आह्वान करते हुए, आधुनिक परिवेश में नई पीढ़ी में भारतीय संस्कारों का संवर्द्धन करने की आवश्यकता बताई। इस सत्र में स्वागताध्यक्ष डा. अभिलाषा प्रकाश ने विषय प्रवर्तन करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। सत्र का संचालन जोनल मंत्री संस्कार (जोन-V) श्रीमती रेखा दीवान ने किया। अधिवेशन उप चेयरपर्सन डा. दिव्या लहरी एवं सत्र संयोजिका श्रीमती वन्दना अग्रवाल भी मंचासीन थीं। इस सत्र में राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री हरीश जिन्दल ने सत्र 2009-10 तथा वर्तमान सत्र में 30 नवम्बर 2010 तक सांगठनिक लक्ष्यों की प्राप्ति करने वाले प्रान्तों व शाखाओं को सम्मानित कराया।

दोपहर में समापन सत्र में मुख्य अतिथि आगरा के सांसद डा. रामशंकर कठेरिया ने भारतीय संस्कृति व राष्ट्रीय गौरव के प्रति भावात्मक लगाव की अपील करते हुए कहा कि भारत विकास परिषद के कार्यकर्ता देश भर में इस अलख को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री ईश्वर दत्त ओझा ने दो दिवसीय अधिवेशन की समीक्षा करते हुए कार्यकर्ताओं से राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से परिषद के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु जुटने का आनान किया तथा अधिवेशन के श्रेष्ठ आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की। अंत में प्रतिनिधियों की ओर से राष्ट्रीय वित्त मंत्री डा. कन्हैया लाल गुप्ता ने तथा आयोजन समिति की ओर से अधिवेशन वित्त संयोजक श्री न्यायदत्त शर्मा ने अभार व्यक्त किया। समापन सत्र के स्वागताध्यक्ष  श्री सहेन्द्र सचदेवा एवं संचालन अधिवेशन संयोजक श्री अनिल भटनागर ने किया। अधिवेशन के सफल आयोजन हेतु सहयोग करने वाले आयोजन समिति के सदस्यों को सम्मानित किया गया, इनमें सर्व श्री बसन्त गुप्ता, संजीव माहेश्वरी, डा. मनोज रावत, डा. जे.के. जुनेजा, डा. अनिल वशिष्ठ, राजेन्द्र बंसल, अशोक गुप्ता, संजय कपूर, डा. योगेन्द्र बाबू अग्रवाल, उमेश बाबू अग्रवाल, डा. आयूष मंगल, वीरेन्द्र सिंहल, डा. कैलाश चन्द सारस्वत, डा. अमित अग्रवाल, रमाशंकर गुप्ता, श्रीमती आकांक्षा शर्मा, विनोद गोयल, सर्वेश वाजयेपी, अजय रंगीला, अनिल बंसल, संजय दीक्षित, गजेन्द्र तोमर, डा. मीरा अग्रवाल, पूनम पाटनी, सुरेश चन्द गुप्ता, तपन सेठ  इत्यादि प्रमुख थे।

Media Reports:


भारत विकास परिषद् उत्कृष्टता सम्मान 2009-10
नामांकन हेतु प्रवृष्ठियों का आमन्त्रण

वर्ष 2008-09 का राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह 4 जुलाई, 2010 को भव्यता के साथ दिल्ली में सम्पन्न हो गया। इसके लिए समस्त सहयोगियों का धन्यवाद एवं बधाई।

वर्ष 2009-10 के राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान हेतु प्रविष्ठियाँ आमन्त्रित की जाती है। इस बार यह सम्मान ग्राम विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति या संस्था को प्रदान किया जाएगा। कोई भी सदस्य, शाखा अथवा प्रान्त परिषद् के केन्द्रीय कार्यालय के पते पर प्रविष्ठि भेज सकते हैं। प्रविष्ठि में व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा किये गये कार्यों का संक्षिप्त विवरण अवश्य दिया जाना चाहिए।

सुरेन्द्र कुमार वधवा                                                       हरीश जिन्दल
  राष्ट्रीय महामन्त्री                                                           राष्ट्रीय संगठन मन्त्री एवं प्रकल्प प्रमुख


प्रान्तीय पदाधिकारी कार्यशाला; 2010

परिषद् के केन्द्रीय कार्यालय, भारत विकास भवन, पीतमपुरा, दिल्ली में समस्त प्रान्तों के नव निर्वाचित पदाधिकारियों की एक कार्यशाला 24-25 अप्रैल, 2010 को आयोजित की गई। विवरण >>



राष्ट्रीय परिवार संस्कार शिविर 5-7 फरवरी 2010 को जम्मू नगर में आयोजित हुआ.
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राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक: 2009

राष्ट्रीय अधिकारियों की दो दिवसीय बैठक 29 एवं 30 अगस्त, 2009 को स्टील सिटी, जमशेदपुर में सम्पन्न हुई। बैठक का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष, रवीन्द्रपाल शर्मा ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के अध्यक्ष श्री दिनेशानन्द गोस्वामी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर के प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाज सेवी गजानन्द भालोटिया थे जो जमशेदपुर शाखा के संरक्षण भी हैं।

       

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बैठक के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला एवं सदस्यता तथा शाखा विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने सेवा एवं संस्कार के महत्वपूर्ण प्रकल्पों जैसे विकलांग सहायता, सामूहिक सरल विवाह, राष्ट्रीय समूहगान, राष्ट्रीय संस्कृत समूहगान, भारत को जानो इत्यादि का पुनर्वालोकन किया। उन्होंने बतलाया कि महाराष्ट्र सरकार ने सामूहिक सरल विवाहों के लिए 50 करोड़ रुपये मंजूर किये हैं जिसका उपयोग परिषद् कर सकती है। मुख्य अतिथि श्री दिनेशानन्द गोस्वामी ने कहा कि देश सुखा, महामारी आदि समस्याओं को सामना कर रहा है एवं इसमें परिषद् को भी योगदान देना चाहिए। विशिष्ट अतिथि श्री गजानन्द ने परिषद् के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की एवं इसके समस्त कार्यों में भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया।

दो दिन की सम्पूर्ण बैठक को 8 सत्रों में विभाजित किया गया था। पृथक विषयों पर विभिन्न पदाधिकारियों ने अपना चिन्तन एवं भविष्य की योजनाऐं प्रस्तुत की। राष्ट्रीय वित्त मंत्री हरीश जिन्दल ने वित्तीय वर्ष 2009-10 का बजट प्रस्तुत किया एवं परिषद् के संस्थापक डॉ. सूरज प्रकाश जी की स्मृति में दिये जाने वाले उत्कृष्टता सम्मान पर प्रकाश डाला। इस वर्ष यह सम्मान पर्यावरण के लिए सर्वोत्कृष्ट कार्य करने वाले किसी व्यक्ति अथवा संस्था को दिया जाएगा। श्री केशव दत्त गुप्ता, राष्ट्रीय संयुक्त संगठन मंत्री तथा राष्ट्रीय मंत्रियों, विस्तार ने सदस्यता अभियान एवं शाखा विस्तार की अपनी योजनाएं प्रस्तुत की। इस वर्ष के लिए 1200 शाखाओं एवं 50000 सदस्यों का लक्ष्य रखा गया है। श्री एस.के.वर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा डॉ. आर.बी.श्रीवास्तव, राष्ट्रीय मंत्री, कार्यशाला ने क्रमश: परिषद् में युवाओं की भागीदारी एवं कार्यशालाओं को अधिक  उपादेय बनाने की योजनाए प्रस्तुत की।

कुछ अन्य विषय जिन पर विस्तार से चर्चा की गई जो निम्न प्रकार थे - श्री एस.के. वधवा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री-भारतीय विवाह कानून, प्रो. एस.पी. तिवारी - निर्वाचन प्रणाली में सुधार, श्री ओ.पी. कानूनगो, ऑडिटर जनरल एवं राष्ट्रीय लेखा -  नियंत्रणक प्रान्तों का पंजीकरण एवं श्री सीताराम पारीक, राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री-ट्रस्ट एवं प्रॉपर्टीज, राष्ट्रीय मंत्री, कानून मामले एवं अनुशासन श्री सतीश चन्द्र ने `क्या राष्ट्रीय उपाध्यक्षों के शीर्ष मण्डल का सदस्य होना चाहिए एवं 75 वर्ष से अधिक आयु में सेवा निवृति का नियम केवल निर्वाचित पदो पर लागु होना चाहिए´ विषयों पर अपनी प्रस्तुति दी एवं अन्य पदाधिकारियों के विचार लिए।

श्री सुरेश चन्द्र, चेयरमैन, प्रकाशन तथा श्री राम शरण श्रीवास्तव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने क्रमश: प्रकाशन की भावी योजनाओं एवं जन सम्पर्क पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। अंतिम सत्र मुक्त चिन्तन को समर्पित था।

इस बैठक में कुल 30 राष्ट्रीय पदाधिकारी उपस्थित थे। जमशेदपुर शाखा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने निवास एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था की थी। इसके शाखा अध्यक्ष श्री अशोक गोयल, सचिव प्रकाश शर्मा, कोषाध्यक्ष चतुर्भुज कोडिया तथा उनके सहयोगी प्रशंसा के पात्र हैं।

समस्त सत्रों का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री, वीरेन्द्र सभरवाल ने किया।

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राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक: 2009

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक भारत विकास भवन, पीतमपुरा, दिल्ली में 20-21 जून, 2009 को सम्पन्न हुई। इस की अध्यक्षता श्री आर.पी.शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा की गई। सर्वप्रथम उपस्थित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को दायित्व ग्रहण की शपथ दिलाई गई। श्री आर.पी.शर्मा ने इस बैठक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को परिषद् की कार्य-प्रणाली, उसके प्रकल्पों एवं आने वाली सभी समस्याओं का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए, तभी वे प्रान्तों एवं शाखाओं में प्रवास के समय कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश दे सकेंगे एवं उनकी समस्याओं का समाधान भी कर सकेंगे। राष्ट्रीय महामंत्री श्री वीरेन्द्र सभरवाल ने 28-29 जून, 2008 को दिल्ली में सम्पन्न हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की कार्यक्रमों की संपुष्टि कराई। सभी उपस्थित सदस्यों ने अपना परिचय दिया।

उसके पश्चात् राष्ट्रीय महामंत्री श्री सभरवाल ने 2008-2009 के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के प्रारम्भ में कुल 929 शाखाऐं थी। वर्ष में 99 शाखाऐं नई खुली किन्तु 65 शाखाऐं निष्क्रिय हो गई। इस प्रकार 31.03.2009 को 965 शाखाऐं कार्यरत थी। सदस्यों की संख्या 37079 से बढ़कर 40310 हो गई एवं केन्द्रीय अंश रु. 54.72 से बढ़कर 59.76 लाख हुआ। इस समय (17.06.2009) को 40 विकास रत्न एवं 1966 विकास मित्र हैं।

इस के पश्चात् शाखा तथा सदस्यता विस्तार पर राष्ट्रीय संगठन मंत्री, एस.के.वधवा, वित्तीय मामलों एवं उतकृष्टता सम्मान पर राष्ट्रीय वित्त मंत्री, हरीश जिन्दल, संविधान एवं उप-नियमों के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर राष्ट्रीय मंत्री सतीश चन्द्र, ट्रस्ट तथा ऑडिट्स/एकाउन्ट्स के विषय में राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री, सीताराम पारीक ने विस्तार से प्रकाश डाला। राष्ट्रीय मंत्री, कार्यशाला, डॉ. आर.बी. श्रीवास्तव ने पुणे तथा चण्डीगढ़ में आयोजित कार्यशालाओं के विषय में विस्तार से बतलाया। क्षेत्रीय प्रभारी तथा राष्ट्रीय संयुक्त संगठन मंत्री, केशव दत्त गुप्ता ने शाखा विस्तार, सदस्य संख्या तथा स्थायी प्रकल्प के लिए निश्चित् किये गये लक्ष्यों का विवरण दिया एवं उन्हें पूर्ण करने के निश्चय को दोहराया। राष्ट्रीय वित्त मंत्री ने बतलाया कि केन्द्रीय अंश के संग्रह में क्षेत्र-5 ने 44%, क्षेत्र-17 ने 35% एवं क्षेत्र-16 ने 25% की वृद्धि की है जो प्रशंसनीय है। इस प्रकार उत्तराखण्ड पश्चिम प्रान्त ने 60%, ब्रज प्रदेश ने 55%, कर्नाटक दक्षिण ने 52% एवं उत्तराखण्ड पूर्व ने 50% की वृद्धि दिखलाई है।

अपरान्ह में सदस्यों को चार ग्रुपों में बांटा गया एवं संस्कार कार्य, सेवा कार्य, सम्पर्क कार्य तथा वित्तीय मामले, विस्तार एवं एकाउन्ट्स पर गहराई से विचार किया गया। प्रथम ग्रुप के अध्यक्ष आई. डी.ओझा एवं ग्रुप लीडर श्री शिवशरण अस्थाना थे। दूसरे की अध्यक्षता वीरेन्द्र सभरवाल ने की एवं ग्रुप लीडर श्री आर.पी.गुप्ता रहे। तृतीय एवं चतुर्थ ग्रुपों में यह कार्य क्रमश: श्री आर.एस.श्रीवास्तव एवं डॉ. के.एल.गुप्ता तथा श्री आर.पी.शर्मा एवं श्री सीताराम पारीक ने किया। 21.06.2009 को प्रथम सत्र में इन चारों ग्रुप लीडर्स ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें प्रत्येक बिन्दु पर अनेक महत्वपूर्ण विचार एवं सुझाव आये।

समापन सत्र मुक्त चिन्तन का था जिसमें सदस्यों द्वारा अनेक सुझाव, शंकाऐं एवं प्रश्न रखे गये जिसका समाधान शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा किया गया।

बैठक के अन्त में 27वर्षीय मेजर ऋषिकेश रमानी की शहादत पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। वे अहमदाबाद निवासी श्री वल्लभभाई रमानी, क्षेत्रीय सचिव, भारत विकास परिषद् के पुत्र थे एवं 7 जून, 2009 को कश्मीर में आतंकवादियों से संघर्ष करते हुए शहीद हुए थे। कुछ अन्य दिवंगत आत्माओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

यह बैठक कई मामलों में अत्यन्त सफल बैठक कही जा सकती है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कुल 103 सदस्यों में से 73 सदस्यों की भागीदारी रही। अनेक विषयों पर विस्तार पूर्वक गंभीर चिन्तन हुआ।

आशा है इस बैठक के निष्कर्ष भावी सफलता का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

(NITI: Aug, 2009)

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द्वितीय राष्ट्रीय परिषद् अधिवेशन `अभ्युदय-2008´

27 दिसम्बर, 2008 शनिवार की ठंड व कोहरे से आच्छादित सुहानी सुबह मेरठ की महाभारतकालीन ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में एकत्र परिषद् के लगभग 3000 सदस्यों, महिलाओं तथा बच्चों की उत्साह व उमंग से ओत-प्रोत उपस्थिति परस्पर प्रेम और सद्भाव का एक सजीव चित्र प्रस्तुत कर रही थी। पूरा हस्तिनापुर भारत विकास परिषद् के सदस्यों से भरा हुआ लगने लगा। परिषद् सदस्यों के जोश व उमंग के आगे ठंड व कोहरे ने पराजय स्वीकार कर ली थी।

नियत समय पर द्वितीय राष्ट्रीय परिषद् अधिवेशन का उद्घाटन सत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष रवीन्द्रपाल शर्मा की अध्यक्षता में भारतमाता व विवेकानन्द के चित्रों पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन तथा वन्देमातरम् के साथ प्रारम्भ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में श्री कृष्ण कृपाधाम वृन्दावन के महामण्डलेश्वर व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज जहाँ मंच की शोभा बढ़ा रहे थे, वहीं पर परिषद् के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर दत्त ओझा, राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र सभरवाल, राष्ट्रीय वित्त मंत्री हरीश जिन्दल, राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेन्द्र कुमार वधवा आदि राष्ट्रीय पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति एक सुखद अहसास करा रही थी।
 

 
   

भारतमाता व विवेकानन्द के चित्रों पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन

प्रान्तीय महासचिव कुलभूषण ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया व अधिवेशन के चेयरमेन व क्षेत्रीय मंत्री नवीन कुमार ने सभी का स्वागत कराया तथा गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। मंच का संचालन अधिवेशन सचिव बीना अग्रवाल व राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री केशव दत्त गुप्ता ने किया।
उद्घाटन सम्बोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष रवीन्द्रपाल शर्मा ने कहा कि द्वितीय राष्ट्रीय परिषद् की बैठक में सदस्यों की उपस्थिति उनकी परिषद् के प्रति प्रतिबद्धता का  अहसास  कराती  है तथा भारत विकास परिषद् भारत  को

 

भारत बनाये रखने के लिए कृतसंकल्प है जिसके लिए देश की दशा व दिशा सही रखना हमारा दायित्च है।

परिषद् देश को सही दिशा देने के लिए `भारत को जानो´ व देशभक्ति के गीतों से ओतप्रोत `राष्ट्रीय समूहगान´ प्रतियोगिताएँ जैसे संस्कारयुक्त कार्यक्रमों का आयोजन करती है तथा सही दशा बनाये रखने के लिए अनेक सेवा कार्य जैसे विकलांग शिविर, स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर का आयोजन करती है। राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र सभरवाल ने कहा कि परिषद् का लक्ष्य स्वस्थ, समर्थ व सुसंस्कृत भारत का निर्माण है। उन्होंने संक्षेप में परिषद् के कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसे उपस्थित सदस्यों ने करतल ध्वनि से अनुमोदित किया।

 

राष्ट्रीय परिषद् अधिवेशन मंच

 
   

प्रथम स्थान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित `अभ्युदय´ स्मारिका का विमोचन मुख्य सम्पादक वागीश दिनकर व सम्पादक मंडल के सदस्यों द्वारा मंचासीन विभूतियों के कर कमलों द्वारा कराया गया।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर दत्त ओझा ने स्वामी ज्ञानानन्द जी का परिचय कराया। पूज्य स्वामी जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि देश में बाह्य विकास तो बहुत हो रहा है किन्तु भारतीय संस्कारों तथा संस्कृति का विकास व प्रचार आज की एक पहली आवश्यकता है जिसे भारत विकास परिषद् अपने पाँच सूत्रों के द्वारा पूरा कर रही है।


ईश्वर दत्त ओझा ने ``विकास रत्नों´´ को स्मृति चिन्ह, नारियल व अंगवस्त्रा प्रदान कर सम्मानित कराया। आतिथ्य प्रान्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय अध्यक्ष रवीन्द्र अग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र सभरवाल ने की जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के सचिवों द्वारा किये गये कार्यों की आख्याएँ प्रस्तुत की गईं।

रात्रि में मनोरंजक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन नीता दुबलिश व मृदुला गोयल के संचालन में किया गया जिसमें भारतीय संस्कृति को समर्पित कार्यक्रमों ने उपस्थित जन समुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। क्षेत्रीय संस्कार प्रमुख कुसुम गुप्ता ने सभी का स्वागत किया।

28 दिसम्बर, 2008 को तृतीय सत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष रवीन्द्रपाल शर्मा की अध्यक्षता में 2007-08 के कार्यों के लिए श्रेष्ठ प्रान्तों को सम्मानित किया गया। प्रथम स्थान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, द्वितीय स्थान पर हरियाणा दक्षिण तथा तृतीय स्थान पर दिल्ली पूर्व को सम्मानित किया गया। मुक्त चिन्तन में प्रश्न, उत्तर व सुझावों का कार्यक्रम चला।

 
   

मनोरंजक सांस्कृतिक संध्या

समापन सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर दत्त ओझा ने व संचालन वीरेन्द्र सभरवाल ने किया। मुख्य अतिथि वेंकटेश्वर लू, आयुक्त मेरठ मण्डल ने सम्बोधन दिया तथा गणिनी प्रमुख  आर्यिका शिरोमणी माता ज्ञानमती जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जीव मात्र के प्रति अहिंसा का भाव सच्ची सेवा है। उन्होंने अहिंसा पर विशेष जोर दिया।

सर्वाधिक विकास रत्न एवं विकास मित्र बनाने पर पंजाब पूर्व प्रान्त को सम्मानित किया गया। संस्कृति सप्ताह में सर्वश्रेष्ठ कार्यों के लिए कैथल (हरियाणा उत्तर), गुरु वन्दन छात्र अभिनन्दन में महाराष्ट्र कोस्टल, विकलांग सहायता में आन्ध्र प्रदेश उत्तर-पूर्व तथा राजस्थान मध्य को सम्मानित किया गया तथा अधिवेशन में सर्वाधिक उपस्थिति के लिए पंजाब पूर्व प्रान्त को पुरस्कृत किया गया।

समापन उद्बोधन द्वारा ईश्वर दत्त ओझा ने आभार प्रदर्शित किया तथा अनुराग दुबलिश अधिवेशन संयोजक व क्षेत्रीय अध्यक्ष इं. वी.के.गुप्ता द्वारा धन्यवाद दिया गया।

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क्षेत्रीय समन्वय समिति की बैठक

क्षेत्र संख्या 4 की क्षेत्रीय समन्वय समिति की द्वितीय बैठक का आयोजन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आतिथ्य में 23 नवम्बर को रॉव फाम्र्स, दादरी में सम्पन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आई.डी.ओझा, राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र सभरवाल, राष्ट्रीय मंत्री, विकास रत्न एवं विकास मित्र, महिम मित्तल, विस्तार मंत्री संजीव बंसल का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त बैठक में क्षेत्र के सभी प्रान्तों के प्रान्तीय एवं क्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय मंत्री, विस्तार संजीव बंसल ने की तथा संचालन नवीन कुमार ने किया। बैठक में रुड़की, उत्तराखण्ड पश्चिम के आतिथ्य में होने वाले राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता में सभी प्रतिनिधियों को सहयोग व आने का निमंत्रण प्रान्तीय महासचिव आभा जिन्दल ने किया और 27-28 दिसम्बर को होने वाले राष्ट्रीय परिषद् अधिवेशन, हस्तिनापुर हेतु सभी प्रान्तों से पंजीकरण अधिकतम कराने का अनुरोध भी किया गया। राष्ट्रीय महामंत्री श्री सभरवाल जी ने परिषद् कार्य को अपनी जीवनशैली का अंग बनाने का निवेदन किया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री ओझा जी ने परिषद् कार्य को ईश्वरीय कार्य बताते हुए इसमें जुट जाने का प्रेरक उद्बोधन किया। राष्ट्रीय मंत्री, विस्तार संजीव बंसल ने अन्त में क्षेत्र के प्रान्तों पर विशेष दायित्व का उल्लेख करते हुए सभी प्रतिनिधियों तथा अतिथिगण का आभार प्रकट किया तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा दादरी शाखा के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया।

(NITI: Feb., 2009)
 

   

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विकलांग सहायता प्रकल्प की कार्यशाला (2008)

विकलांग सहायता प्रकल्प की पाँचवी राष्ट्रीय तकनीशियन कार्यशाला लुधियाना में आयोजित की गई। इस चार दिवसीय कार्यशाला में समस्त भारत के 13 केन्द्रों के 22 तकनीशियनों एवं दो प्रबन्धकों ने भाग लिया।

समस्त को चार ग्रुप में विभक्त कर प्रत्येक ग्रुप द्वारा कृत्रिम हाथ, पांव एवं पोलियों केलिपर अपनी-अपनी तकनीक से निर्माण कर उन पर चर्चा की गई। पोलियों केलिपर में HDPE / Allum. /  PP Sheet की मदद से नई तकनीक की जानकारी पर विचार किया गया। हैदराबाद के नलिनेश बाबु द्वारा कृत्रिम कोनी से उपर के हाथ का निर्माण बिना ऐलिमको हेन्डकिट के HDPE से किया गया। जो कि वजन में हल्का, लागत में कम तथा केवल दिखावटी था। तथा कोनी से नीचे के बनावटी हाथ का भी निर्माण किया गया। साथ ही कार्यशाला के महत्व तथा विकलांगों के साथ व्यवहार की जानकारी यशपाल गुप्ता द्वारा दी गई। तकनीशियन की व्यावहारिक समस्या एवं आवश्यकता को प्रथमेश देसाई के द्वारा समझने का प्रयास किया गया। पोलियों आपरेशन का जीवन्त प्रदर्शन दिखाया गया जिसमें 13 पोलियों आपरेशन हुए।

चौथे दिन समापन समारोह में 84 विकलांग बन्धु जिनके लिए कृत्रिम अंगों का निर्माण कार्यशाला में किया गया था, उनका वितरण किया गया। समस्त तकनीशियनों का सम्मान कर उन्हें स्मृति स्वरूप कम्बल एवं स्वेटर प्रदान किये गये। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लुधियाना की सामाजिक न्याय एवं सहकारिता की सदस्या इन्द्रप्रीत कौर तथा समाजसेवी मनोरमा शर्मा, जिन्होंने भा. वि. प. को सहायता करने का आश्वासन दिया।  अध्यक्षता परिषद् के रा. उपाध्यक्ष   एस्. एस.  जैन द्वारा की गई। पवन अग्रवाल द्वारा चेरिटेबल ट्रस्ट लुधियाना द्वारा कार्यशाला की जानकारी दी गई। कार्यशाला का महत्व एवं लुधियाना ट्रस्ट का आभार प्रथमेश देसाई द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विशेष रूप से राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र सभरवाल उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन यशपाल गुप्ता द्वारा किया गया और अन्त में ट्रस्ट के पूर्व अèयक्ष जितेन्द्र प्रसाद गुप्ता द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।

उसी दिन 13 केन्द्रों के पदाधिकारियों एवं विकलांग सहायता प्रकल्प की राष्ट्रीय समिति की बैठक आयोजित की गई। अंत में एस. एस.  जैन द्वारा समस्त तकनीशियनों को मेडीक्लेम इंश्योरेन्स का आश्वासन दिया गया।


 

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